सांसद आदर्श ग्राम योजना | Sansad Adarsh Gram Yojana 2022

सांसद आदर्श ग्राम योजना क्या है ?

सांसद आदर्श ग्राम योजना की घोषणा माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 11 अक्टूबर 2014 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी की जयंती पर की गई।

सांसद आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत सभी लोकसभा सांसदों को हर वर्ष एक गांव का उसे विकास कर जनपद की बांकी ग्रामसभाओं के लिए आदेश स्थापित करना था जिससे वहां के लोग अपने जीवन में सुधार लाकर दूसरों के लिए भी एक उदाहरण बन सकें।

यह योजना संसद के दोनों सदनों लोक सभा एवं राज्य सभा को भी प्रोत्साहित करती है कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कम से कम एक गांव की पहचान करें और साल 2016 तक एक आर्दश गांव के रूप मे उसका विकास करें और साल 2019 तक दो और नए गांवों को शामिल करते हुए देश भर मे लगभग 6 लाख गांवों में से कम से कम 2500 से अधिक गावों को इस योजना का हिस्सा बनाएं।

सांसद आदर्श ग्राम योजना के उद्देश्य :

  • इस योजना के तहत देश के गांवों को सम्रग विकास के साथ आगे बढ़ाना आदर्श ग्राम योजना के अन्तर्गत चुने गए ग्राम का विकास सांसद की देख-रेख मे होना चाहिए साथ ही ग्राम पंचायतों के समग्र विकास के लिए नेतृत्व की प्रक्रियाओं की गति प्रदान करने के साथ-साथ जनसंख्या के सभी वर्गो के जीवन की गुणवत्ता के स्तर में भी सुधार लाना और ये सुधार निम्न माध्यमों से लाया जा सकता है।
  • साफ-सफाई की भावना को आगे बढ़ाना |
  • ग्रामीण सुमुदाय में शांति एवं सौहार्द को बनाए रखना आपसी तालमेल को बढ़ावा देना |
  • लोगों की विकास में भागीदारी को प्राथमिकता देना समाज के बीच महिला एवं पुरुष के बीच में समानता स्थापित करना |
  • अंत्योदय सिद्धांत का अनुसरण एवं पालन करना सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना |
    स्थानीय स्व- शासन की सहायता करना करना |
  • भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्यो, अधिकारों और नैतिक जिम्मेदारियों का स्वतः पालन करना |
  • प्रकृति की सुरक्षा एवं उसकी देखभाल करते हुए विकास और पर्यावरण में संतुलन सुनिश्चित करना ।
  • सामाजिक जीवन में पारदर्शिता, जवाब देही और ईमानदारी को बढ़ाना ताकि इससे दूसरों को प्रेरित किया जा सके समाज के प्रति असमानताओं को कम करना एवं भाईचारे को बढ़ावा देना ।
संसद आदर्श ग्राम योजना

सांसद आदर्श ग्राम योजना से लाभ :

  • इस योजना से देश के गांवों में कई प्रकार के लाभ देखने को मिलेगा।
  • इससे गांव के आस पास विकास शुरू होगा जिससे गांव से पलायन मे कमी आएगी।
  • बंधुवा मजदूरी, बालश्रम तथा मेला ढ़ोने से मुक्ति मिलेगी नागरिक जागरूक साथ-साथ शिक्षित भी होगें।
  • जन्म मृत्यु के मामलो का शत प्रतिशत पंजीकरण होगा |
  • आजीविकाओं एवं रोजगार के नए अवसर पैदा होगें।
  • समाज मे रहने वाले सभी वर्गों के लिए वैकल्पिक समाधान प्रणाली का विकास होगा |

सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चयन किए गए
ग्रामों की वास्तविकता क्या है :

सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत सभी सांसदों को एक गांव गोद लेकर उस गांव का विकास करना था इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने किया प्रधानमंत्री मोदी ने भी एक गांव को गोद लिया वो गावं बनारस से 25 किलोमीटर दूर स्थित जयापुर है

इस गांव को विकास का मॉडल बनाने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने इस गांव को गोद लिया इस गांव में कई जाति व समुदाय के लोग मिल-जुल कर रहते हैं। इस गांव की लोगों का मुख्य काम (व्यवसाय) कृषि यानि खेती है जहाँ ज्यादातर लोग किसान है,

प्रधानमंत्री जी द्वारा जयापुर गांव को गोद लेने के बाद यहां पहले के अपेक्षा विकास में वृद्धि हुई है। आज इस गांव मे बुनियादी सुविधा उपलब्ध है वैसे तो कहा जाता है यह गांव वर्षों से संघ का गढ रहा है यहां का पर संघ का विस्तार काफी ज्यादा है।

जब सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत हुई उस वक्त तो इसकी चर्चा खूब थी लेकिन समय के साथ यह बिल्कुल शांत पड़ गया शुरू में तो सांसदो ने इसे तवज्जो देते हुए अपनाथा था लेकिन अब अहमियत बिल्कूल भी नहीं रही। अब तक उपलब्ध आंकड़ो के अनुसार योजना के प्रथम चरण में 703 सांसदों ने हिस्सा लिया था और धीरे-धीरे घट कर चौथे चरण तक यह मात्र 252 रह गई है।

2019 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार केवल 208 सांसदों ने अपने द्वारा चयनित किए गए गांव का नाम साझा किया, जिसमें से 208 में से 44 सांसद राज्यसभा के थे।
हाल ही में स्टैंडिंग कमेटी द्वारा सांसद आदर्श ग्राम योजना के कार्यों में तेजी लाने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नियंत्रित किये जाने का सुझाव दिया है।

स्टार सांसदों द्वारा गोद लिया गया गांव :

सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने 6 गांवों को गोद लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी का जयापुर गांव को गोद लिया उसके बाद क्रमश: नागेपुर काकरहिया एवं डोमरीफ गाँव को गोद लिया। उसके बाद 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी के पुरे बरियारपुर तथा परमपुर गांव को भी गोद लिया है।

सोनिया गांधी – रायबरेली लोकसभा सांसद अपने क्षेत्र में ही उडवा गांव को गोद लिया।
राहुल गाँधी अमेठी लोकसभा सांसद अपने ही क्षेत्र में डीह गाँव को गोद लिया ।

अहमद पटेल – गुजरात के राजपीपाड़ा के वंदरी गांव को गोद लिया अहमद पटेल भी गुजरात से ही आते हैं।

वी. के. सिंह उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र गाजियाबाद में मीरपुर हिंदू गांव की गोद लिया।

कमलनाथ सिंह – इन्होने अपने छिंदवाड़ा जिले के विसापुर कलां गांव को गोद लिया।

शुरू मे सभी सांसदों को एक गांव गोद लेना था उसके बाद साल 2016 में एक और गांव बढ़ा दिया गया जिसके हिसाब से साल 2014-2019 तक 5 वर्षो में कुल 2370 गांवों को गोद लेकर विकास करने का लक्ष्य रखा गया। साल 2019-24 तक प्रत्येक सांसद के ऊपर 5 गावों के विकास का लक्ष्य रखा गया।

इस प्रकार से 5 वर्षों में 3950 गावों का विकास करने का लक्ष्य रखा गया। इस प्रकार साल 2014-24 तक देश के कुल 6320 गांव को गोद लेकर विकास करना है परंतु धरातल पर अभी बहुत दूर है यह योजना और इसकी आधिकारिक वेबसाइट को भी देख सकते है |

और पढ़े :

Leave a Comment